Depression का पक्का ईलाज। Anxiety । Stress

(Depression): बहुत से व्यक्तियों को जीवन में कभी न कभी किन्हीं कारणोंवश कुछ समय के लिए डिप्रेशन हो जाता है। उदासी एवं मानसिक परेशानी के बीच वे संघर्ष करते रहते हैं | कुछ समय बाद वे व्यक्तिगत, पारिवारिक तथा सामाजिक उलझनों पर विजय पा लेते हैं। इस परिस्थिति को मानसिक रोग या डिप्रेशन नहीं कह सकते । डिप्रेशन उस अवस्था का नाम है जब कोई व्यक्ति दिन-प्रतिदिन निराश रहने लगता है, उसका किसी काम में मन नहीं लगता, घर, परिवार, काम-काज, व्यवसाय, सुख–आराम सब व्यर्थ प्रतीत होते हैं और जीवन बोझल लगने लगता है।

डिप्रेशन दो प्रकार का होता है-(i) रिएक्टिव डिप्रेशन-reactive depression (ii) एन्डोजिनस डिप्रेशन-endogenous depression. रिएक्टिव डिप्रेशन का कोई कारण होता है यथा किसी बहुत प्रिय व्यक्ति की मृत्यु, प्यार में असफलता तथा वित्तीय नुकसान इत्यादि । एन्डोजिनस डिप्रेशन व्यक्ति के अन्दर से ही बगैर किसी

कारण जागृत होता है। कई बार इस प्रकार का डिप्रेशन वाइरल इन्फेक्शन (Viral infection) तथा कई स्त्रियों को बच्चे को जन्म देने के बाद हारमोनस परिवर्तन (hormonal changes) के कारण होता है।

डाक्टरों की ऐसी भी राय है कि कई दवाइयों के अधिक खाने, थाइरॉयड ग्रन्थि के ठीक प्रकार काम न करने, स्त्रियों में हॉरमोनस के असंतुलन, मधुमेह-शूगर रोग, भूखे रह कर वजन घटाने की स्थिति, व्यायाम न करने तथा पौष्टिक खुराक न खाने के कारण भी डिप्रेशन का रोग हो जाता है। डिप्रेशन के रोग में मुख्यतः शारीरिक शक्ति कम हो जाती है, नींद नही आती, भूख नहीं लगती, पेट खराब रहने के अतिरिक्त कब्ज रहती है और सिर दर्द भी रहने लगता है । स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है, अकेला रहने को मन करता है, अपने आप से घृणा हो जाती है, किसी काम में मन नहीं लगता, मन में बुरे-बुरे विचार आते है, शरीर में दर्द रहने लगता है, बिना काम किए थकावट प्रतीत होती है, विवाहित व्यक्तियों की सेक्स में रुचि कम हो जाती है या समाप्त हो जाती है और ऐसे व्यक्ति भविष्य के बारे में सोचना बंद करके वर्तमान को भी नरक बना देते हैं।

अगर डिप्रेशन का कोई कारण है तो सबसे पहले उसे दूर करने की यथासंभव कोशिश करनी चाहिए। डिप्रेशन वाले व्यक्ति से पूरी सहानुभूति करके उसका मनोबल बढ़ाना चाहिए। उसे यह समझाना चाहिए कि जीवन एक संघर्ष है और संघर्ष के लिए हमेशा सहर्ष तैयार रहना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को संतो, महात्मों तथा प्रेरणामय नेताओं के जीवन गाथाओं को पढ़ने की प्ररेणा देनी चाहिए। डिप्रेशन वाले व्यक्ति को अकेले नहीं रहने देना चाहिए। मधुर संगीत, सैर, व्यायाम तथा अच्छी फिल्में ऐसे व्यक्ति की भावना शीघ्र परिवर्तित करती हैं । जहाँ तक इलाज का सम्बन्ध है एक्युप्रेशर द्वारा कुछ ही दिनों में डिप्रेशन दूर किया जा सकता है। ऐसे सैकड़ों रोगी इस पद्धति से लाभ प्राप्त कर चुके हैं।

बेचैनी (Anxiety): लगातार बेचैनी रहना या बार-बार बेचैनी की भावना रहना निश्चय ही एक मानसिक रोग है। इस रोग के कई लक्षण है। इस रोग में व्यक्ति क्षुब्ध रहता है, वह ठीक प्रकार सोच नहीं सकता, नींद ठीक नहीं आती, डरावने सपने आते है, भय लगता है, हथेलियों में पसीना आता है तथा आवाज ठीक प्रकार निकल नहीं पाती। कई रोगी खाना भी ठीक प्रकार नही खा पाते, कई साँस भी कठिनाई से लेते है, कइयों की सेक्स में रुचि खत्म हो जाती है या सेक्स की कमजोरी अनुभव करते है, कई रोगियों को रूक-रूक कुछ दिनों बाद दस्त लग जाते हैं तथा पेट खराब रहता है। अधिकतर रोगियों को बगैर किसी कारण बैचैनी रहती है। छोटी-छोटी बात से वे घबरा जाते हैं तथा कहीं जाने के लिए दूसरे व्यक्ति का साथ चाहते हैं।

यह रोग पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों को अधिक होता है। थाइरॉयड ग्रन्थि के अधिक क्रियाशील (over active) हो जाने के कारण भी यह रोग हो जाता है। इस रोग का अगर कोई कारण ज्ञात हो तो सर्वप्रथम उसे दूर करना चाहिए | अधिक आराम करना, धीमा-धीमा मधुर संगीत सुनना, मन पसंद पुस्तकें पढ़ना तथा कुछ यौगिक आसन करना इस रोग में लाभप्रद रहते हैं। एक्युप्रेशर द्वारा यह रोग सहज ही दूर किया जा सकता है।

मानसिक तनाव (Mental Tension): वाल्टर टेम्पिल ने मानव जीवन को बहुत ही उपयुक्त शब्दों में चित्रित करते हुए कहा है कि ” केवल मनुष्य ही रोता हुआ पैदा होता है , शिकायत करता हुआ जीता है और निराश मरता है। ” आज के वैज्ञानिक युग में जबकि मनुष्य भौतिक प्रगति की चरम सीमा को छू रहा है उसका निजी जीवन अनेक समस्याओं से घिरा हुआ है । घर , दफ्तर और कारोबार की उलझनों ने उसकी मानसिक शांति खत्म कर दी है । आज का मनुष्य मानसिक तनाव में जी रहा है और यही मानसिक परेशानी उसके अनेक रोगों का कारण है ।

मानसिक तनाव दूर करने के लिए यह जरूरी है कि चिंता, भय, आशंका, निराशा, घृणा, ईर्ष्या, तृष्णा, लोभ, अविश्वास तथा असुरक्षा की भावना को त्यागकर आत्म-विश्वास तथा आशावादी दृष्टिकोण अपनाया जाये।

मानसिक तनाव का रोग अधिकतर उन लोगों को होता है जिन की नवर्ज़ कमजोर हों। अपने मनोबल को मजबूत बनाने के अतिरिक्त ऐसे लोगों को हल्का भोजन तथा शाकाहारी भोजन लेना चाहिए जो सुपाच्य हो । इसके अतिरिक्त भोजन को अच्छी तरह चबा कर खाना चाहिए । हल्का व्यायाम तथा सैर ऐसे लोगों के लिए उत्तम हैं। मानसिक रोग दूर करने के लिए अपने काम में मन लगाना बहुत जरूरी है। इस रोग में दवाइयाँ निसंदेह कुछ देर के लिए आराम पहुँचाती हैं पर इनका लम्बे समय तक सेवन नुकसान पहुंचाता है अतः इन्हें छोड़ना ही चाहिए । एक्युप्रेशर द्वारा मानसिक तनाव बहुत जल्दी दूर किया जा सकता है।

फोबिया (Phobia): यह एक प्रकार का बेबुनियाद डर है जिससे कई व्यक्ति रोग ग्रस्त हो जाते हैं- Aphobia is an irrational fear ofa specific object or situation. इस रोग के कई मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं । यह बहुत जरूरी है कि इन मूलभूत कारणों का पता लगा कर उन्हें दूर किया जाये तथा रोगी की मानसिक अवस्था को सशक्त बनाया जाये । एक्युप्रेशर द्वारा मनुष्य की मानसिक शक्ति को प्रबल बनाया जा सकता है जिससे फोबिया आदि मानसिक रोग बहुत जल्दी दूर हो जाते हैं । मनुष्य की आंतरिक शक्ति ही उसको सबल या निर्बल बनाती है।

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